gk of bihar in hindi

बिहार भारत का एक ऐतिहासिक और सांस्कृतिक प्रदेश है। इसकी राजधानी पटना है। यहाँ का इतिहास मगध, नालंदा और विक्रमशिला जैसे प्राचीन विश्वविद्यालयों से जुड़ा है। बिहार में बोधगया, सोनपुर मेले और प्राकृतिक सुंदरता भी प्रसिद्ध हैं। यह प्रदेश कृषि और उद्योग में भी आगे है।

GK Of Bihar in Hindi

GK Of Bihar in Hindi

बिहार का भौगोलिक परिचय

नाम: बिहार
कुल क्षेत्रफल: 94163 वर्ग किमी
क्षेत्रफल प्रतिशत: 2.86%
समुद्र तल से ऊंचाई: 173 फीट (52.73 मी)
समुद्र तट से दूरी: 200 किमी
बिहार-ओडिशा से अलग हुआ: 22 मार्च 1912
झारखण्‍ड अलग हुआ बिहार से: 15 नवंबर 2000
अक्षांश (Latitude): लगभग 24°20′ से 27°31′ उत्तर
देशांतर (Longitude): लगभग 83°19′ से 88°17′ पूरब
उतर से दक्षिण की दूरी: 345 कि.मी.
पश्च्मि से पूरब की दूरी: 483 कि.मी.
बिहार का सबसे बड़ा जिला: पश्चिमी चंपारण (क्षेत्रफल लगभग 5,228 वर्ग किलोमीटर)
बिहार का सबसे छोटा जिला: शिवहर  (क्षेत्रफल लगभग 349 वर्ग किलोमीटर)
बिहार में सर्वाधिक लिंगानुपात वाला जिला: गोपालगंज है, जहाँ प्रति 1000 पुरुषों पर 1021 महिलाएँ हैं। (2011 की जनगणना के अनुसार)
बिहार में सबसे कम लिंगानुपात वाला जिला: मुंगेर और भागलपुर, जहाँ प्रति 1000 पुरुषों पर 879 महिलाएँ हैं। (2011 की जनगणना के अनुसार)
बिहार में सर्वाधिक साक्षरता वाला जिला: रोहतास (साक्षरता दर 73.37% दर्ज की गई, जो राज्य के सबसे शिक्षित जिलों में से एक है. )
बिहार में सबसे कम साक्षरता दर वाला जिला: पूर्णिया, जहाँ साक्षरता दर 51.08% है.
बिहार में जनसंख्या घनत्व वाला जिला: शिवहर है, जहाँ प्रति वर्ग किलोमीटर 1882 व्यक्ति निवास करते हैं। उसके बाद पटना जिला दूसरे स्थान पर है।  
 बिहार में सबसे कम जनसंख्या घनत्व वाला जिला: कैमूर है, जिसका जनघनत्व 488 व्यक्ति प्रति वर्ग किलोमीटर है.
बिहार में सबसे अधिक साक्षरता दर वाला जिला: रोहतास  है, जिसकी साक्षरता दर 73.37% है। रोहतास को ‘बिहार का ऑक्सफोर्ड’ भी कहा जाता है क्योंकि यहाँ शिक्षा का महत्व समझा जाता है और साक्षरता दर के साथ-साथ शिक्षा को बढ़ावा देने के लिए भी प्रयास किए जाते हैं। 
बिहार में सबसे कम महिला साक्षरता दर वाला जिला: सहरसा है, जहाँ महिला साक्षरता दर 42.73% है। 
बिहार में सबसे अधिक वर्षा वाला जिला: किशनगंज, औसत वार्षिक वर्षा 2000 मिमी से अधिक होती है, जिसे ‘बिहार का चेरापूंजी’ भी कहा जाता है।
बिहार में सबसे कम वर्षा वाला जिला: औरंगाबाद है, और इसे बिहार के सबसे शुष्क जिलों में से एक माना जाता है। 
बिहार में सबसे कम तापमान वाले जिले की पहचान समय-समय पर बदलती रहती है, लेकिन सर्दी के मौसम में गया, डेहरी और बांका अक्सर सबसे ठंडे स्थानों में होते हैं.

बिहार का राजनैतिक परिचय

विवरणआंकड़ा / विवरण
बिहार में जनसंख्या1,04,09,9452 (2011 की जनगणना के अनुसार)
बिहार में जनसंख्या % (देश में)8.60%
देश में स्थान (जनसंख्या)3
बिहार में लिंगानुपात918
बिहार में शिशु लिंगानुपात935
बिहार में दशकीय वृद्धि दर25.4%
बिहार में जनसँख्या घनत्व1106
देश में स्थान (जनसँख्या घनत्व)1
बिहार में साक्षरता दर61.8%
बिहार में पुरुष साक्षरता71.2%
बिहार में महिला साक्षरता51.5%
प्रमंडल9
जिले38 (नया – अरवल)
अनुमंडल101
प्रखंड534
ग्राम पंचायत8387
वार्ड(शासन की न्यूनतम इकाई)
लोकसभा सीट40
राज्यसभा सीट16
विधानसभा सीट243
विधानपरिषद सीट75
राजकीय प्रतीकबोधि वृक्ष
राजकीय फूलगेंदा
राजकीय पक्षीगौरैया
राजकीय पशुबैल
राजकीय चिन्ह (वृक्ष)बोधि वृक्ष
राजकीय वृक्षपीपल
राजकीय मछलीमांगुर

बिहार के बन्‍य जीव अभ्‍यारण्‍य

जिला / स्थानअभ्यारण्य / राष्ट्रीय उद्यान का नामविवरण / विशेषता
प. चम्पाग्णरवाल्मीकि नगर राष्ट्रीय उद्यानएकमात्र राष्ट्रीय उद्यान
उदयपुरवन्यजीव अभ्यारण्य
वैशालीबदला सलीम अलीझुब्बा साहनी अभ्यारण्य
बक्सरबक्सर पक्षी बिहारपक्षी अभ्यारण्य
कैमूरकैमूर वन्यजीव अभ्यारण्य
गयागौतम बुद्ध अभ्यारण्यबौद्ध धर्म से जुड़े वन्यजीव अभ्यारण्य
पटनासंजय गांधी जैविक उद्यानजीवविविधता एवं वनस्पति का संरक्षण स्थल
राजगीर, नालंदाराजगीर अभ्यारण्य, पंत अभ्यारण्यऐतिहासिक एवं प्राकृतिक स्थल
बेगूसरायकंवर झील पक्षी अभ्यारण्यपक्षी अभ्यारण्य
कटिहारगोगा बिल पक्षी अभ्यारण्यपक्षी अभ्यारण्य
भागलपुरविक्रमशिला पक्षी बिहार, विक्रमशीला गांगेय डॉलफिन अभ्यारण्यपक्षी एवं जलजीव अभ्यारण्य
मुंगेरभीमबांध अभ्यारण्य
जमुईनागि डैम पक्षी अभ्यारण्य, नकटी डैम पक्षी अभ्यारण्यपक्षी अभ्यारण्य

बिहार का खनिज संसाधान

खनिज संसाधानजिलाविवरण / उपयोग
कोयलापूर्णिया, गया, जमुई, अरवलउर्जा उत्पादन में प्रयोगशाला
लोहा (आयरन ओक्साइड)गया, जमुई, लखीसरायइस्पात उद्योग के लिए आवश्यक
चूना पत्थरअरवल, खगड़िया, भागलपुरनिर्माण और सीमेंट उद्योग में उपयोग
क्रिस्टल और क्वार्ट्जकैमूर, भोजपुर, गयाइलेक्ट्रॉनिक्स और ज्वेलरी में प्रयोग
तांबाअरवल, भागलपुरविद्युत उद्योग में उपयोग
बॉक्साइट (बॉक्साइट खनिज)अरवल, गयाएल्युमीनियम उत्पादन के लिए आवश्यक
मिट्टी और बलुआ पत्थरसमस्तीपुर, भागलपुर, खगड़ियानिर्माण सामग्री
सिलिका (सिलिका रेत)मुंगेर, भागलपुरकांच उद्योग में प्रयोग
फॉस्फेटअरवल, गयाउर्वरक में प्रयोग

मुख्य जिले और उनके खनिज संसाधान:

गया: कोयला, जिप्सम, लौह अयस्क, फॉस्फेट

जमुई: कोयला, लोहा, जिप्सम

अरवल: कोयला, बॉक्साइट, क्रिस्टल, फॉस्फेट

भोजपुर: क्वार्ट्ज, सिलिका

खगड़िया: चूना पत्थर, सिलिका

समस्तीपुर: मिट्टी, बलुआ पत्थर

भागलपुर: सिलिका, मिट्टी

मुंगेर: सिलिका, फॉस्फेट

ध्यान दें: बिहार में खनिज संसाधान का उपयोग और इसकी खोज समय-समय पर नई तकनीकों और खोजों के आधार पर बदलती रहती है। अधिक जानकारी के लिए बिहार खनिज विभाग या केंद्रीय खनिज मंत्रालय की रिपोर्ट देख सकते हैं।

बिहार की नदियाँ

बिहार की प्रमुख नदियों के नाम, उनके जिले, लंबाई, और अन्य विवरण निम्नलिखित हैं:

नदी का नामजिलेलंबाई (किमी)बड़ा या छोटाविशेषताएँ / विवरण
गंगापटना, भागलपुर, मुंगेर, बेगूसराय, खगड़िया आदिलगभग 1,569बड़ाबिहार की मुख्य नदी, राष्ट्रीय नदी, बिहार का जीवनरेखा।
कोसीपूर्णिया, सहरसा, मधेपुरा, सुपौल, अररियालगभग 320बड़ाबारहमासी नदी, बार-बार बाढ़ का कारण।
घाघरा (गोरखा नदी)पूर्वी चंपारण, पश्चिमी चंपारणलगभग 150छोटाकोसी की सहायक नदी।
पुनपुनपटना, गयालगभग 80छोटागंगा की सहायक नदी।
सोनजहानाबाद, गया, औरंगाबाद, नवादालगभग 750बड़ागंगा की प्रमुख सहायक नदी।
झेलम (झेलम)बिहार में मुख्य रूप से सीमावर्ती क्षेत्रछोटाछोटासीमावर्ती नदी, पाकिस्तान में जाकर मिलती है।
बागमतीपूर्वी चंपारण, पश्चिमी चंपारण, सीवानलगभग 480बड़ाबाढ़ प्रभावित, खेती के लिए उपयोगी।
पुनपुनपटना, गयालगभग 80छोटाधार्मिक और ऐतिहासिक महत्व।
टोंटी (टोंटी नदी)मुजफ्फरपुरछोटाछोटाछोटी नदी, स्थानीय उपयोग।

नोट: लंबाई का मान विभिन्न स्रोतों में भिन्न हो सकता है।

बड़ा या छोटा का निर्धारण मुख्यतः नदी की लंबाई और प्रवाह के आधार पर किया गया है।

बिहार की नदियाँ मुख्यतः गंगा, कोसी, सोन, बागमती आदि हैं, जो कृषि, पेयजल, और परिवहन में महत्वपूर्ण भूमिका निभाती हैं।

बिहार की नदी घाटी परियोजनाएँ

बिहार की नदी घाटी परियोजनाएँ (River Valley Projects) जल संसाधन, सिंचाई, बिजली उत्पादन और बाढ़ नियंत्रण के उद्देश्य से बहुत महत्वपूर्ण हैं। ये परियोजनाएँ बिहार में नदी प्रणालियों का व्यवस्थित प्रबंधन करने में मदद करती हैं। यहाँ बिहार की प्रमुख नदी घाटी परियोजनाओं की जानकारी दी गई है:

बिहार की प्रमुख नदी घाटी परियोजनाएँ

परियोजना का नामसंबंधित नदीमुख्य उद्देश्यविवरण / उपयोगिता
कोसी नदी परियोजनाकोसीबाढ़ नियंत्रण, सिंचाई, बिजलीकोसी का पानी नियंत्रित करने के लिए बांध और जलाशय बनाए गए हैं।
गंगा घाटी परियोजनागंगाबाढ़ नियंत्रण, सिंचाई, जल आपूर्तिगंगा का पानी नियंत्रित कर बाढ़ से सुरक्षा, सिंचाई और पेयजल।
सोन नदी परियोजनासोनसिंचाई, बिजलीसोन नदी पर बांध, जलाशय और पावर प्लांट।
बागमती नदी परियोजनाबागमतीबाढ़ नियंत्रण, सिंचाई, बिजलीबागमती नदी पर बांध और जलाशय।
पुनपुन नदी परियोजनापुनपुनसिंचाई, जलापूर्तिपटना जिले में जल संकट दूर करने के लिए।
महानंदा नदी परियोजनामहानंदासिंचाई, बाढ़ नियंत्रणनदी का नियंत्रित प्रवाह और जलाशय।
घाघरा नदी परियोजनाघाघराबाढ़ नियंत्रण, सिंचाईबिहार-उत्तर प्रदेश सीमा पर बाढ़ नियंत्रण।

मुख्य बातें: कोसी परियोजना भारत की सबसे बड़ी नदी घाटी परियोजनाओं में से एक है, जो बिहार के बाढ़ नियंत्रण और सिंचाई के लिए अत्यंत महत्वपूर्ण है।

गंगा घाटी परियोजना बिहार में अनेक बांध और जलाशयों का निर्माण कर बाढ़ से सुरक्षा और जल आपूर्ति सुनिश्चित करती है।

बांध और जलाशय बनाकर इन परियोजनाओं का उद्देश्‍य जल संरक्षण, बिजली उत्पादन और फसलों की सिंचाई है।

इन परियोजनाओं के माध्यम से बिहार में कृषि और उद्योग की आर्थिक स्थिति मजबूत होती है।

बिहार के जलप्रपात एवं झील

बिहार के प्रमुख जलप्रपात (Waterfalls)

पचरुखी झरना (Pachruki Waterfall) 
स्थान: मुजफ्फरपुर जिला          
विशेषता: यह छोटा लेकिन सुंदर जलप्रपात है, जो प्राकृतिक सुंदरता के लिए जाना जाता है।
 
अयोध्या घाट जलप्रपात (Ayodhya Ghat Waterfall)
स्थान: सुपौल जिला
विशेषता: यह झरना प्राकृतिक दृश्यों का आनंद लेने के लिए प्रसिद्ध है।
 
सोनपुर जलप्रपात (Sonpur Waterfall)
स्थान: सोनपुर, सारण जिला
विशेषता: यह कम ऊंचाई वाला जलप्रपात है, जो आसपास के क्षेत्र की सुंदरता को बढ़ाता है।

बिहार की प्रमुख झीलें (Lakes)

पानम झील (Panaam Lake)
स्थान: पटना
विशेषता: यह छोटी झील है जो प्राकृतिक सुंदरता और शांत वातावरण के लिए जानी जाती है।
 
सोनपुर झील (Sonpur Lake)
स्थान: सोनपुर, सारण जिला
विशेषता: यह झील मछली पकड़ने और वॉटर स्पोर्ट्स के लिए प्रसिद्ध है।
 
सासाराम की झीलें (Sasaram Lakes)
स्थान: सासाराम
विशेषता: यहां की झीलें प्राकृतिक सुन्दरता और पक्षियों के लिए आकर्षण का केंद्र हैं।
 
मीरगंज झील (Meerganj Lake)
स्थान: गोपालगंज जिला
विशेषता: यहाँ की झीलें स्थानीय लोगों के मनोरंजन और पानी की आपूर्ति के काम आती हैं।

बिहार की प्रमुख मिट्टियाँ

सिंहस्थ मिट्टी (Alluvial Soil)
विवरण: बिहार में सबसे व्यापक रूप से पाई जाने वाली मिट्टी है। यह नदी घाटियों में पाई जाती है, विशेषकर गंगा, कोसी, सोन और बागमती जैसी नदियों के किनारे।
विशेषताएँ: उपजाऊ, जलधारण क्षमता अच्छी, धान जैसी फसलों के लिए उपयुक्त।
 
बालू मिट्टी (Sand Soil)
विवरण: यह मिट्टी मुख्य रूप से नदी के किनारे और कुछ क्षेत्रों में पाई जाती है।
विशेषताएँ: जलधारण क्षमता कम, फसलों के लिए उपयुक्त नहीं, जल निकासी अच्छी है।
 
कृषि मिट्टी (Loamy Soil)
विवरण: इसमें रेत और मृदा दोनों का मिश्रण होता है, जो फसलों के लिए उपयुक्त है।
विशेषताएँ: उपजाऊ, जलधारण क्षमता अच्छी, मुख्य रूप से कृषि के लिए प्रयोग होती है।
 
शैली और काली मिट्टी (Black Soil)
विवरण: बिहार के कुछ भागों में पाई जाती है, विशेषकर पश्चिमी भागों में।
विशेषताएँ: उपजाऊ, फसलों के लिए उपयुक्त, खासकर कपास और ज्वार की खेती के लिए।
 
क्षारयुक्त मिट्टी (Saline Soil)
विवरण: यह मिट्टी उन क्षेत्रों में पाई जाती है जहाँ पानी का अधिक उपयोग या जल निकासी की समस्या है।
विशेषताएँ: उर्वरता कम, खेती के लिए उपयुक्त नहीं।
 
मुख्य बातें: बिहार की मिट्टियाँ मुख्य रूप से सिंहस्थ (Alluvial) हैं, जो इसकी कृषि और आर्थिक गतिविधियों का मुख्य आधार हैं।
इन मिट्टियों का उपयोग मुख्य रूप से धान, गन्ना, मक्का, ज्वार और बाजरा जैसी फसलों के लिए किया जाता है।
मिट्टी की गुणवत्ता और प्रकार के अनुसार कृषि तकनीक और फसल चयन तय होते हैं।

बिहार की चट्टानें

चट्टान का प्रकारविवरणस्थानउपयोग/विशेषताएँ
ग्रेनाइट (Granite)मजबूत और कठोर चट्टान, भूगर्भिक रूप से पुरानीपश्चिमी बिहार, भागलपुर, मुंगेरनिर्माण, मूर्तिकला, सड़क निर्माण
सैंडस्टोन (Sandstone)बलुई चट्टान, जो अक्सर निर्माण में प्रयोग होती हैभागलपुर, मुजफ्फरपुर, सीवानभवन निर्माण, स्थापत्य कला
शिलाएँ (Schist, Slate)मेटामॉर्फिक चट्टानें, पर्वतीय क्षेत्रों में पाई जाती हैंपूर्वी बिहार के पर्वतीय क्षेत्रनिर्माण, आर्ट वर्क
मोल्डाइट्स (Moldite)पुरानी मोल्डिंग चट्टानें, कम मात्रा में पाई जाती हैंविभिन्न क्षेत्रपारंपरिक निर्माण में उपयोग

बिहार का जलवायु क्षेत्र

बिहार का जलवायु क्षेत्र मुख्य रूप से उष्णकटिबंधीय और उपोष्णकटिबंधीय का मिश्रण है। यहाँ का जलवायु क्षेत्र विविधता से भरपूर है, जो मुख्य रूप से मानसून की ऋतु, तापमान और वर्षा पर निर्भर करता है। नीचे इसकी प्रमुख विशेषताएँ तालिका के रूप में दी गई हैं:

क्षेत्रविशेषताएँमुख्य विशेषताएँप्रभावी तत्व
पूर्वी बिहार (मौसम क्षेत्र)उष्णकटिबंधीय उपोष्णकटिबंधीय जलवायुउच्च तापमान, भारी वर्षा, आर्द्रता अधिकमानसून की वर्षा, नदी प्रणाली
पश्चिमी बिहार (मौसम क्षेत्र)शुष्क और अर्धशुष्क जलवायुकम वर्षा, गर्मी अधिक, सूखे का प्रभावकृषि और जल संसाधनों पर प्रभाव
बिहार का मैदानी भागउष्णकटिबंधीय, मानसून पर निर्भरगर्मी, वर्षा, आर्द्रता, मानसून का प्रभावफसलों का उत्पादन, नदी का प्रवाह
पर्वतीय क्षेत्र (सातताल, आदमपुर आदि)उष्णकटिबंधीय पर्वतीय जलवायुठंडक, वर्षा, हिमपात का प्रभाव (कुछ स्थानों पर)पर्वतीय जैव विविधता, पर्यटन

मुख्य विशेषताएँ:

मानसून: जून से सितंबर तक भारी वर्षा होती है।

तापमान: गर्मी में 25-45°C तक पहुंच सकता है।

वर्षा: वार्षिक वर्षा लगभग 1000-1500 मिमी, क्षेत्रानुसार भिन्न।

मौसम परिवर्तन: गर्मी, बरसात और सर्दी के ऋतुओं का प्रभाव स्पष्ट है।

बिहार का भौगोलिक विभाजन

बिहार का भौगोलिक विभाजन मुख्य रूप से तीन भागों में किया जाता है: मैदानी क्षेत्र, पर्वतीय क्षेत्र और तराई क्षेत्र। नीचे इस विभाजन को सारणी के रूप में प्रस्तुत किया गया है:

भौगोलिक क्षेत्रविशेषताएँस्थानप्रमुख विशेषताएँ
मैदानी क्षेत्रसमतल भूमि, उपजाऊ, नदियों का जाल, नदी घाटियाँपूर्वी, पश्चिमी, और मध्य बिहारकृषि का प्रमुख क्षेत्र, बागवानी, सड़कों का जाल
पर्वतीय क्षेत्रपहाड़ियां, हरे भरे जंगल, चोटियां, झरनेसीमावर्ती क्षेत्र, दक्षिणी बिहार के कुछ भागपर्वतीय जैव विविधता, पर्यटन स्थल
तराई क्षेत्रनदियों का डेल्टा, ऊंचाई में अधिक, दलदली भूमिनेपाल सीमा के निकट, उत्तर बिहार का भागकृषि के लिए उपजाऊ, बाढ़ का खतरा

विस्तृत विवरण:

मैदानी क्षेत्र: बिहार का अधिकतर हिस्सा मैदानी है, जिसमें गंगा, कोसी, गंडक और मिथिला जैसी नदियों का प्रवाह होता है। यह क्षेत्र कृषि और औद्योगिक गतिविधियों का केंद्र है।

पर्वतीय क्षेत्र: दक्षिणी बिहार में पच्छिमगढ़, भागलपुर और सुल्तानगंज जैसे स्थानों पर पर्वतीय क्षेत्र पाए जाते हैं, जो मुख्य रूप से छोटा नागपुर पठार का हिस्सा हैं।

तराई क्षेत्र: उत्तरी बिहार में नेपाल सीमा के पास बसा है, जहाँ बाढ़ का खतरा रहता है और जलप्रवाह अधिक है।

बिहार के वन

बिहार के प्रमुख जिले (वर्ग किमी में) का क्षेत्रफल और वन क्षेत्र

जिलाक्षेत्रफल (वर्ग किमी)वन क्षेत्र (वर्ग किमी) / प्रतिशतविवरण
बिहार का सबसे बड़ा जिला9,982लगभग 15% (समीप), वन क्षेत्र का प्रतिशत अलग-अलगपूर्वी चंपारण, पश्चिमी चंपारण, खगड़िया आदि बड़े जिले हैं।
सबसे छोटा जिला1,157वन क्षेत्र का प्रतिशत कम या अधिक हो सकता हैपूर्णिया, अररिया, किशनगंज जैसे जिले छोटे हैं।

उदाहरण के तौर पर:

पूर्वी चंपारण का क्षेत्रफल लगभग 9,982 वर्ग किमी है, जो बिहार का सबसे बड़ा जिला है।

पूर्णिया का क्षेत्रफल लगभग 1,157 वर्ग किमी है, जो बिहार का सबसे छोटा जिला है।

वन क्षेत्र का अनुमान:

बिहार का कुल वन क्षेत्र लगभग 12-15% of कुल क्षेत्रफल है।

कुछ जिलों में वन क्षेत्र अधिक हैं, जैसे पश्चिमी चंपारण और गया।

छोटे जिलों में वन क्षेत्र कम हो सकता है।

नोट: प्रत्येक जिले का सटीक वन क्षेत्र का आंकड़ा अलग-अलग स्रोतों पर निर्भर करता है।

बिहार की कृषि

फसल (Crop)औसत उत्पादन (प्रति हेक्टेयर)प्रमुख जिले (Districts)
धान (Rice)2.5 – 3.0 टनपटना, भागलपुर, मुजफ्फरपुर, समस्तीपुर
गेंहू (Wheat)2.0 – 2.5 टनभागलपुर, सहरसा, बेगूसराय, नवादा
मक्का (Maize)1.8 – 2.2 टनगया, अररिया, भागलपुर
मटर (Peas)0.8 – 1.2 टननालंदा, कटिहार, किशनगंज
ज्वार (Sorghum)0.6 – 0.9 टनमुजफ्फरपुर, भागलपुर, कैमूर
कपास (Cotton)0.5 – 0.7 टनगया, पटना, जहानाबाद

महत्वपूर्ण नोट:  उपर्युक्त आंकड़े अनुमानित हैं और वर्ष, तकनीक और कृषि प्रथाओं के आधार पर भिन्न हो सकते हैं।

बिहार में धान मुख्य फसल है, और यह राज्य के अधिकांश जिलों में प्रमुखता से उगाई जाती है।

अन्य फसलें जैसे मक्का, ज्वार, और कपास भी कुछ जिलों में विशेष रूप से उगाई जाती हैं।

बिहार के उद्योग एवं जिले

प्लाईवुड कारखानावैशाली हाजीपुर
सीमेंट उद्योगडालमिया नगर रोहतास
खनन उद्योगऔरंगाबाद
सूती वस्त्रगया
कागज़समस्‍तीपुर/दरभंगा
जूट उद्योग/दियासलाईकटिहार
थर्मल पावर स्टेशन (केंद्रीय) उर्वरक उद्योग (केंद्रीय)बरौनी
बन्दुक कारखाना सिगेरट कारखानामुंगेर
रेशम उद्योगभागलपुर
सिंदूर उद्योगलखीसराय
भारत बैगन एंड इंजीनियरिंग कंपनी लिमिटेड (केंद्रीय) चमड़ा (जूता) उद्योगपटना/मोकामा
पटाखा उद्योग बिहार स्टेट स्कूटर्स लिमिटेड – फतुहा पटना डेयरी उद्योगपटना/मोकामा

बिहार में पर्यटन स्‍थल

जिलास्‍थल
पश्चिम चम्‍पारणवाल्मीकि नगर वैराज, वाल्मीकि राष्ट्रीय उद्यान, भितिहरवा आश्रम
सारणपुरातात्विक स्थल (चिगंद)
भोजपुरजगदीशपुर किला (आरा)
कैमूरमुंडेश्वरी देवी मंदिर
पूर्वी चम्‍पारणलौरिया अरेराज, केशरिया स्तूप
वैशालीविश्व शांति स्तूप, अशोक स्तम्भ, सोनपुर मेला
पूर्णियाजलालगढ़ किला
सहरसाकन्दहा सूर्य मंदिर
भागलपुरमहमूद शाह का मकबरा
मुंगेरमुंगेर किला
औरंगाबाददाऊद खान किला, सूर्य मंदिर
गया (बोधगया)  महाबोधि मंदिर, बोधि वृक्ष (5वीं पीढ़ी), बुध कुंड, डुंगेश्वरी पहाड़ी, विष्णुपद मंदिर, रामशिला पहाड़, प्रेतशिला पहाड़, ब्रह्वायोनि पहाड़
नवादाअपसढ़ गढ़
नालंदानालंदा विश्वविद्यालय विश्व शांति स्तूप राजगीर
पटना  गोलघर, बुद्ध स्मृति पार्क, शहीद स्मारक, पत्थर की मस्जिद, शेरशाह सूरी मस्जिद, खुदाबख्श पुस्तकालय, सदाकत आश्रम, अगमकुआं, गाँधी सेतु, तारामंडल, कुम्हरार, पटना साहिब

बिहार का प्राचीन इतिहास और खोजेगऐ अवशेष

जिला / क्षेत्रप्रमुख अवशेष / स्थल / खोजे गए अवशेषविवरण / महत्व
पश्चिम चंपारणलौरिया नंदन गढ़, मृगश्रृंग के उपकरण, नवपाषाण युग के अवशेष (चिरांद), हड्डी के वस्तुएँ, पत्थर से बने सूक्ष्म औजारप्राचीन मानव जीवन के अवशेष, नवपाषाण कालीन संस्कृति का उदाहरण।
सारणमृगश्रृंग के उपकरण, नवपाषाण युग के अवशेष (चिरांद), हड्डी के बनी वस्तुएँ, पत्थर के औजारप्राचीन औद्योगिक विकास और मानव जीवन के प्रारंभिक चरण के संकेत।
वैशालीहड्डी के वस्तुएँ, पत्थर के सूक्ष्म औजार, मृदभांड, मिट्टी के बर्तन, नवपाषाण युग के अवशेष (चेचर), विश्व की पहली पूर्वी गंत्रतात्मक शासन व्यवस्थाविश्व की पहली गणतंत्रात्मक शासन प्रणाली का स्थल, बौद्ध धर्म का महत्वपूर्ण केंद्र।
पूर्वी चंपारणकेशरिया स्तूप, बौद्ध स्तूप, लौरिया अरेराजबौद्ध धर्म का महत्वपूर्ण स्थल, स्तूप और धार्मिक स्थल।
दरभंगामहाजनपद – वज्जि (राजधानी – वैशाली / विदेह / मिथिला)ऐतिहासिक और राजनीतिक केंद्र, प्राचीन भारतीय राज्य व्यवस्था का उदाहरण।
भागलपुरमहाजनपद – अंग (राजधानी – चंपा)प्राचीन महाजनपद का क्षेत्र, ऐतिहासिक महत्व।
मुंगेरपत्थर की कुल्हाड़ी, पत्थर के औजार, मध्य पाषाण युग के अवशेषप्राचीन मानव जीवन के अवशेष, पाषाण युगीन अवशेषों का संरक्षण।
गयामहाजनपद – मगध (राजधानी – गिरिव्रज / राजगृह)बौद्ध धर्म का प्रमुख स्थल, ऐतिहासिक और धार्मिक महत्व।

मगध राज्‍य का उत्‍कर्ष

क्रमांकवंश नामकालावधिराजधानीसंस्थापकअंतिम शासक
1वृहद्रथ वंश1700-682 BCराजगृहवृहद्रथरिपुंजय
2हर्यक वंश544-412 BCराजगृहबिम्बिसारनागदशक
3शिशुनाग वंश412-344 BCवैशालीशिशुनागनन्दिवर्धन
4नन्द वंश344-323 BCपाटलिपुत्रमहापद्मनंदधनानंद
5मौर्य वंश323-298 BCपाटलिपुत्रचन्द्रगुप्त मौर्यवृहद्रथ
6गुप्त वंश319-467 CEपाटलिपुत्रश्रीगुप्तविष्णुगुप्त

बिहार में जनजातीय आंदोलन

क्र.सं.नामकालावधिक्षेत्रप्रमुख नेता / व्यक्तित्वकारण / उद्देश्यअतिरिक्त जानकारी
1तमाड़ विद्रोह1789-1799छोटानागपुर, तमाड़भोलानागपुर सहाय, विष्णु मानकी, दुखन मुंडा, ठाकुर विश्वनाथ सिंहजमींदारों द्वारा शोषण, भूमि का जबरदस्ती अधिग्रहणप्रमुख कारण: जमींदारों का शोषण
2हो विद्रोह1820-1821कोल्हन पोटो, सरदार क्षेत्रकोल्हन पोटोभूमि और कर की वृद्धिसामाजिक और आर्थिक शोषण
3कोल विद्रोह1831-1832छोटानागपुर, पलामू, सिंहभूमसिंगराई मानकी, सुरगा मुंडा, बुद्ध भगत, बिंदराई मंकीभूमि और कर की समस्या, आदिवासी अधिकारों का संघर्षप्रमुख विद्रोहियों का नेतृत्व
4बहावी आंदोलन1828-1888पटनाविलायत अली, इलायत अली, हाजी सरियतुल्लाहफसली आंदोलन, किसानों का शोषण, भूमि सुधार की माँगयह आंदोलन फ़श्याजी आंदोलन के नाम से भी जाना जाता है
5गंगा नारायण भूमिज विद्रोह1832-1833वीरभूम (बड़ाभूम)गंगा नारायणअंग्रेजों का अत्याचार और भूमि का अधिग्रहणइसे “गंगा नारायण का हंगामा” भी कहा गया है
6संथाल विद्रोह1855-1856संथाल परगनासिद्ध, कान्हू, चाँद, भैरवब्रिटिश शोषण, भूमि की लूट, सांस्कृतिक संघर्षसंथाल हूल (विद्रोह) के नाम से भी प्रसिद्ध
7मुंडा विद्रोह1899-1900रांची क्षेत्रबिरसा मुंडाअंग्रेजी शोषण, भूमि और संसाधनों का शोषणबिरसा मुंडा की मृत्यु 9 जून 1900 को हुई
8ताना भगत आंदोलन1914-1919छोटानागपुर, बिहारजात्रा भगत, सिद्ध भगतगांधी से प्रेरणा, अहिंसक विद्रोह, किसानों और आदिवासियों का संघर्षस्वतंत्रता आंदोलन से जुड़ा हुआ था

बिहार के समाचार पत्र और पुस्तकें

नामभाषासंपादक / उल्लेखनीय व्यक्तिप्रारंभ वर्ष / विवरण
विहारी (बिहारी टाइम्स)हिंदीचावू महेश्वर प्रसाद1906 में नाम बदला गया, बिहार में प्रमुख समाचार पत्र
बंगाल गजट / कलकत्ता जनरल / हिक्की गजटअंग्रेजीआयरिशमैन जेम्स ऑगस्टस हिक्की (1779)पहला अंग्रेजी पत्र, बिहार से संबंधित समाचार भी शामिल
नूर अल अनवरउर्दू
अखवार ए बिहारउर्दू साप्ताहिकसैयद मोहम्मद हासिल (1853)बिहार का उर्दू साप्ताहिक पत्र
अखबार अख्यागबिहार साइंटिफिक सोसाइटी
बिहार टाइम्समहेश नागयण
द बिहार हेराल्डअंग्रेजी (प्रथम साप्ताहिक समाचार पत्र, 1875)
द सर्चलाइटअंग्रेजीमुग्ली मोहन प्रसादप्रथम दैनिक समाचार पत्र
विहार बंधुहिंदीप्रथम साप्ताहिक समाचार पत्र, 1874
सर्वहितैषीहिंदीप्रथम हिंदी दैनिक समाचार पत्र, 1882
देशहिंदीराजेंद्र प्रमादसाप्ताहिक
मदरलैण्‍डहिंदीमजहरुल हक

प्रमुख समाचार पत्र

क्रमांकसमाचार पत्र का नामप्रारंभ वर्षभाषाविशेषता / उल्लेखनीयता
1दैनिक जागरण (बिहार संस्करण)1947हिंदीबिहार का सबसे प्रसिद्ध और व्यापक प्रसार वाला समाचार पत्र।
2अमर उजाला (बिहार संस्करण)1948हिंदीबिहार में लोकप्रिय, व्यापक पाठक वर्ग वाला समाचार पत्र।
3प्रभात खबर (बिहार संस्करण)1957हिंदीबिहार में प्रमुख समाचार पत्र, सामाजिक और राजनीतिक खबरें।
4बिहार टाइम्स2000 के बादहिंदी/अंग्रेज़ीबिहार की विशेष खबरें और सम्प्रेषण के लिए प्रसिद्ध।
5मुकुट समाचारहिंदीबिहार का लोकल समाचार पत्र।ग्रामीण और शहरी क्षेत्रों में लोकप्रिय।

प्रमुख पुस्तकें (इतिहास, संस्कृति और राजनीति पर)

क्रमांकपुस्तक का नामलेखक / प्रकाशकविषय / विवरण
1बिहार का इतिहासडॉ. रामविलास शर्माबिहार का ऐतिहासिक एवं सामाजिक विकास।
2बिहार: संस्कृति और संस्कृतिडॉ. धर्मेंद्र कुमारबिहार की सांस्कृतिक विरासत।
3बिहार का स्वतंत्रता संग्रामडॉ. राजेंद्र प्रसादबिहार से जुड़े स्वतंत्रता संग्राम के नायक।
4बिहार में लोककला और परंपराडॉ. विनोद कुमार मिश्रबिहार की लोककला, संगीत, नृत्य आदि।
5बिहार का राजनीतिक इतिहासप्रो. लक्ष्मण प्रसाद मिश्रबिहार की राजनीति और आंदोलन।
6बिहार के वीर सपूतअनिल कुमार सिंहबिहार के स्वतंत्रता सेनानियों का जीवन।

निष्कर्ष

बिहार के समाचार पत्र और पुस्तकें उसकी सामाजिक, सांस्कृतिक और ऐतिहासिक विरासत का प्रतिबिंब हैं। ये न केवल जानकारी का स्रोत हैं बल्कि बिहार की पहचान को भी मजबूत बनाते हैं।

बिहार के चर्चित व्‍यक्ति

नामजन्मतिथि / उपाधि / उल्लेखनीय कार्यअतिरिक्त जानकारी / योगदान
श्री कृष्णा सिंहउपाधि – बिहार केसरी, श्री बाबू , बिहार के पहले मुख्यमंत्री, आधुनिक बिहार के निर्माता, जिंदारी प्रथा समाप्त करने वालेबिहार का प्रथम मुख्यमंत्री, आधुनिक बिहार का निर्माता
राहुल सांकृत्यायनमूल नाम – केदार नाथ पडिय , असहयोग आंदोलन में भाग, किसान आंदोलन के प्रमुख नेतालेखक, इतिहासकार, यात्रा वृतांत के प्रसिद्ध लेखक
अनुग्रह नारायण सिन्हाजन्म – 18 जून 1887, उपाधि – बिहार विभूति, चम्पारण सत्याग्रह में भाग, बिहार प्रदेश कांग्रेस कमिटी में विभिन्न पदप्रथम उप मुख्यमंत्री, कांग्रेस नेता, सत्याग्रह में भाग
श्याम नंदन मिश्राजन्म – 20 अक्टूबर 1920, भारत छोड़ो आंदोलन में भाग, बिहार विधान सभा के सदस्य (1958)राजनीति में महत्वपूर्ण नेता, बिहार के पूर्व मुख्यमंत्री
भिखारी ठाकुरजन्म – 18 दिसंबर 1887 (सारण), भोजपुरी नाट्यकार, लेखकबिढेशिया, भाई-वरोध, बेटी-वियोग, कलयुग प्रेम आदि नाटकों के रचनाकार
मौलाना मजहकल हकजन्म – 22 दिसंबर 1866 (पटना), चम्पारण सत्याग्रह में भाग, होम कल आंदोलन का नेतृत्वसमाचार पत्र ‘दि मढग्लेड’ (1921), असहयोग आंदोलन में भागीदारी
सैय्यद हसन इमामजन्म – 31 अगस्त 1871 (पटना), अध्यक्ष – इंडियन नेशनल कांग्रेस (1918), सचिव – स्वदेशी लीग (पटना)खिलाफत आंदोलन में सक्रिय, स्वतंत्रता संग्राम में भागीदारी, समाचार पत्र सर्जना
योगेंद्र शुक्लजन्म – 1896 (गुजफ्फरपुर), भारत छोड़ो आंदोलन में भाग, बिहार विधान सभा के सदस्य (1958)स्वतंत्रता संग्राम सेनानी, बिहार के नेता
डॉ. राजेंद्र प्रसादजन्म – 3 दिसंबर 1884, भारत के प्रथम राष्ट्रपति, उपाधि – देशरत्‍न, अजातशत्रुदेश के पहले राष्ट्रपति, स्वतंत्रता संग्राम में भागीदारी
जगजीवन रामजन्म – 5 अप्रैल 1905, उपाधि – बाबूजी, प्रथम श्रम मंत्रीस्वतंत्रता संग्राम सेनानी, बिहार के नेता

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